जिंदगी क्या है ????

 जीवन इस ब्रह्मांड का सबसे अनसुलझे रहस्य में से एक है 

शायद ही कोई महापुरुष या दूर कहे आदमी या आम आदमी इसे सही से जान पाए

बहुत से लोगों ने इसे समझने की कोशिश की और दूसरो को समझ की मगर शायद न तो बो खुद समझ के कारण और न दूसरो को समझा। 

कबी लोगों ने जीवन के बारे में बहुत कुछ लिखा महात्माओं ने बहुत कुछ समझा मगर पूरी तरह से कोई भी इसे समझ नहीं पाए

किसी ने कहा कि जीवन इत्तेफाक हैं

किसी ने कहा है जिंदगी प्यार का गाना है

किसी ने कहा कि जिंदगी बेबफा है

मतलब हर आदमी ने कुछ न कुछ जिंदगी के बारे में लिखा मगय नाम कोई लेखन ही नहीं पाया

आज दुनिया को बने करोड़ों साल हो गए मगर आज भी जीवन नाम का ये शब्द एक अनसुलझे रहस्य की तरह हमारे सामने खड़ा है

क्या दुनिया की दौलत जिंदगी हैं

क्या दुनिया की खूबसूरत जिंदगी हैं

क्या दुनिया के रिश्ते जिंदगी हैं

करै मजबूती से जीवित हैं

तो जिंदगी हैं क्या बला???

बाकी आगे ......।

भाग 2

जब हम किसी पैसे बाले को देखते हैं तो कहते है यार इसकी जिंदगी तो मजे मे हैं और जब किसी मजदूर आदमी को देखतें हैं तो कहते है यार इसकी जिंदगी तो नर्क है

अब यहां भी कन्फ्यूजन

जिंंदगी का पैमाना आदमी के अमीरी गरीबी अच्छे बुरे का हिसाब किताब देखकर होता है लेकिन ये सब भी बेमानी बाते हैं दरअसल जिसको लोग जिंदगी का पैमाना बताते हैं दरअसल बो तो आदमी के अच्छे या बुरे करँम हैं इससें जिंदगी का कोई लेना देना ही नही तो फिर सबाल बही आकर खड़ा हो जाता है कि आखिर जिंदगी हैं क्या  किसी की जिंदगी फूलो की सेज की तरह हैं तो किसी की जिंदगी कांटो भरी हैं सब अपने अपने तरीक़े से जिंदगी जी रहे है सबका अपना अपना ऊसूल हैं जिंदगी जीने का किसी की जिंदगी दुनिया की तमाम सुख सुबिधाओं के बाबजूद भी सही नही है तो कोई दो बक्त की रोटी खाकर अपनी जिंदगी में मस्त हैं सबाल ये नही कि आप सुखी हो या दुखी हो सबाल ये हैं कि आपको जो ये जिंदगी मिली हैं उसको आप जीते कैसे हैं एक आदमी की जिंदगी लगभग सौ सालो की होती हैं मगर कोई सौ तो कोई पचास कोई बीस तो कोई तीस साल मे अपनी जिंदगी जी कर संसार से चले जाते है मन मे एक ही सबाल लिए हुए कि हमने अपनी जिंदगी मे क्या किया आप भी जब जिंदगी के उस मोड़ पर आ जाओगे जब जिंदगी तुम्हें किसी लायक नही छोडेगी तब अकेले मे बैठकर अपनी पिछली जिंदगी को याल करोगे यहां भी बढ़ी अजीब बात हैं जिंदगी अगली पिछली बीच की होती हैं इस हिसाब से जिंदगी को भी समय मे बांट दिया गया हैं कि किस उम्र से लेकर किस उम्र तक आपने अपनी जिंदगी में क्या किया बचपन की जिंदगी कैसी रही जबानी की जिंदगी कैसी रही और आगे की जिंदगी कैसी रहेगी एक जिंदगी बो भी हैं जिसे लोग मानते हैं कि सबसे अच्छी जिंदगी हैं बो हैं साधु महात्माओं और फकीरों की जिंदगी लेकिन बहां भी स्बार्थ की जिंदगी छुपी हुई हैं दरअसल नब्बे प्रतिशत बो लोग साधु बनते हैं जो बास्तबिक जिंदगी से घबराकर एक छलाबे की जिंदगी जीने लगते हैं जो संसारिक करत्ब्यो को पूरा नही कर पाते जो इस मेहनत कस जिंदगी से हार मान जाते हैं बो जाकर सबकुछ छोड़कर साधु बन जाते है और अपनी जिंदगी दूसरो के रहमोकरम पर छोड़ देते है उसे भी आप एक जिंदगी कह सकते है बैसे इस मनुष्य की जिंदगी एक ऐसी दौड़ जो लगातार अनंत काल से चल रही हैं जो जितना तेज दौड़ता हैं बो उतना आगे निकल जाता हैं सीधी सी बात है जो जितना दौड़ा उतना आगे निकल गया जिंदगी की अमीरी गरीबी इसी बात पर निर्भर करती हैं कि कौन कितना दौड़ा आज जो दुनिया में असमानता दिखाई पड़ती हैं ये सब उसी का नतीजा है शेष आगे.....

 

Comments